सोमवार, 3 अक्टूबर 2011

आज सोमवार - नवरात्रि का संयोग..ये शिव-देवी मंत्र बनाएंगे धन व सुख संपन्न



शास्त्रों के मुताबिक शिव जगतपिता तो आदि शक्ति जगतजननी या माता हैं। शिव को सत्य स्वरूप व सत्य का जीवन में उतरना ही शक्ति संपन्नता का रहस्य माना गया है। यही कारण है कि शिव उपासना शक्ति साधना के बिना व शक्ति पूजा शिव भक्ति के बिना अधूरी मानी गई है।

अर्द्धनारीश्वर स्वरूप में शिव के बाएं भाग में देवी स्वरूप हो या काली के पैरों में शिव का स्वरूप भी शिव-शक्ति की महिमा उजागर करता है। सार यही है कि अगर शिव की भांति कल्याण भाव जीवन में उतारें तो सबल बनने में वक्त नहीं लगता यानी शक्ति भी स्वत: ही प्राप्त हो जाती है।

यही कारण है कि शक्ति साधना के काल नवरात्रि में सोमवार के दिन शक्ति के साथ शिव उपासना बहुत मंगलकारी मानी गई है। क्योंकि इस दिन शक्ति व शिव के विशेष मंत्रों का ध्यान सुख, वैभव की कामना को पूरी कर दरिद्रता का अंत करने वाला माना गया है। जानते हैं यह विशेष मंत्र व पूजा विधि-

- प्रात: स्नान के बाद शिव व देवी की मूर्तियों को जल व पंचामृत से स्नान के बाद  शिव को चंदन, अक्षत, बिल्वपत्र व सफेद पकवान का भोग व देवी को लाल चंदन, लाल फूल, लाल वस्त्र व लाल फलों का भोग लगाकर नीचे लिखें शिव मंत्र व देवी के बीज मंत्रों का रुद्राक्ष या स्फटिक की माला से यथाशक्ति या कम से कम एक माला जप वैभवशाली जीवन की कामना से करें -

- शिव मंत्र -

ऊँ साम्ब सदाशिवाय नम:

देवी बीज मंत्र -

ऊँ दुं दुर्गायै नम:

या

ऊँ ऐं ह्रीं क्ली दुं दुगायै नम:

- शिव-शक्ति की पूजा व मंत्र जप के बाद आरती करें और कर्म, वचन, आचरण के दोषों के लिये क्षमा प्रार्थना करें।
source: dainik bhaskar

शनिवार, 1 अक्टूबर 2011

...इसलिए देवी को कहते हैं दुर्गा



पुरातन काल में दुर्गम नामक दैत्य हुआ। उसने भगवान ब्रह्मा को प्रसन्न कर सभी वेदों को अपने वश में कर लिया जिससे देवताओं का बल क्षीण हो गया। तब दुर्गम ने देवताओं को हराकर स्वर्ग पर कब्जा कर लिया। तब देवताओं को देवी भगवती का स्मरण हुआ। देवताओं ने शुंभ-निशुंभ, मधु-कैटभ तथा चण्ड-मुण्ड का वध करने वाली शक्ति का आह्वान किया।

देवताओं के आह्वान पर देवी प्रकट हुईं। उन्होंने देवताओं से उन्हें बुलाने का कारण पूछा। सभी देवताओं ने एक स्वर में बताया कि दुर्गम नामक दैत्य ने सभी वेद तथा स्वर्ग पर अपना अधिकार कर लिया है तथा हमें अनेक यातनाएं दी हैं। आप उसका वध कर दीजिए। देवताओं की बात सुनकर देवी ने उन्हें दुर्गम का वध करने का आश्वासन दिया। यह बात जब दैत्यों का राज दुर्गम को पता चली तो उसने देवताओं पर पुन: आक्रमण कर दिया। तब माता भगवती ने देवताओं की रक्षा की तथा दुर्गम की सेना का संहार कर दिया।  सेना का संहार होते देख दुर्गम स्वयं युद्ध करने आया।

तब माता भगवती ने काली, तारा, छिन्नमस्ता, श्रीविद्या, भुवनेश्वरी, भैरवी, बगला आदि कई सहायक शक्तियों का आह्वान कर उन्हें भी युद्ध करने के लिए प्रेरित किया। भयंकर युद्ध में भगवती ने दुर्गम का वध कर दिया। दुर्गम नामक दैत्य का वध करने के कारण भी भगवती का नाम दुर्गा के नाम से भी विख्यात हुआ।

source: dainikbhaskar